हिमालय की घाटी पर सूर्योदय और भगवा ध्वज वाला पहाड़ी मंदिर

जय श्री राम · जय हनुमान

हनुमान अंश — परदे पर एक कथा, पहाड़ों में एक उपस्थिति।

हाल ही में रिलीज़ हुई यह फ़िल्म और नीम करोली बाबा की जीवंत स्मृति यहाँ एक साथ मिलती हैं। कथा देखिए, उपदेशों के साथ बैठिए, कैंची धाम की यात्रा की योजना बनाइए, और अपने बाद आने वालों के लिए अपने भाव यहाँ छोड़ जाइए।

चार द्वार

आप जिस भी राह से आए हों, भीतर आने का मार्ग है।

जोड़ने वाला सूत्र

ये दोनों एक ही पृष्ठ पर क्यों हैं

भक्ति

हनुमान स्वयं भक्ति हैं

हनुमान केवल बलवान नहीं हैं; वे वह बल हैं जो पूर्णतः प्रेम की सेवा में समर्पित है। फ़िल्म इसी धुरी पर घूमती है, और यही गुण भक्तों ने महाराज जी में देखा।

कैंची

उसी नाम पर बना एक मंदिर

नीम करोली बाबा ने 1964 में कैंची धाम में हनुमान मंदिर की स्थापना की। कुछ लोग हनुमान जी के लिए आते हैं और महाराज जी को पा लेते हैं, कुछ महाराज जी के लिए आते हैं और हनुमान जी को।

सेवा

सेवा ही साधना है

“सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो, राम को याद करो।” फ़िल्म का शौर्य और आश्रम का नि:शुल्क भंडारा — दोनों एक ही शिक्षा के दो रूप हैं।
“किसी को अपने हृदय से मत निकालो।”

नीम करोली बाबा से संबद्ध